गेहूं की बुवाई 15 नवंबर तक करें: ICAR की सलाह, जानें अपने क्षेत्र के लिए बेहतर किस्में

गेहूं की बुवाई 15 नवंबर तक करें: ICAR की सलाह, जानें अपने क्षेत्र के लिए बेहतर किस्में

रबी सीजन की सबसे बड़ी फसल गेहूं की बुवाई का सही समय आ गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) ने किसानों को सलाह दी है कि समय पर बोई जाने वाली गेहूं की बुवाई 1 से 15 नवंबर के बीच पूरी कर लें। देर से बुवाई करने पर मार्च-अप्रैल की गर्मी दाना भरने के समय फसल को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे पैदावार घटती है।

क्षेत्र के हिसाब से उन्नत किस्में

उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी आदि) के सिंचित खेतों के लिए सुझाई गई किस्में:

  • DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 332
  • WPC 1270, PWD 872
  • DBW 370, DBW 371, DBW 372

मध्य क्षेत्र (मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान के कोटा-उदयपुर संभाग) के लिए:

  • DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445
  • JW 1399, PWD 906, HD 3463, JW 543

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसान अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्मों की जानकारी नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से ले सकते हैं।

बुवाई के समय जरूरी बातें

  • बीज उपचार: बोने से पहले बीज का उपचार करें, ताकि फसल रोगों से बची रहे।
  • खेत की तैयारी: पलेवा करके खेत में सही नमी रखें।
  • बीज दर: आमतौर पर 40 किलो प्रति एकड़ के आसपास, किस्म के अनुसार।
  • पंक्ति में बुवाई: सीड ड्रिल से बुवाई करने पर बीज की बचत और अंकुरण बेहतर होता है।
  • पहली सिंचाई: बुवाई के करीब 20-25 दिन बाद ताजमूल अवस्था में।

देर हो जाए तो क्या करें

अगर किसी कारण 15 नवंबर तक बुवाई नहीं हो पाती, तो किसानों को पछेती (देर से बोई जाने वाली) किस्में चुननी चाहिए और बीज दर थोड़ी बढ़ानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय, सही किस्म और संतुलित खाद-पानी से गेहूं की बंपर पैदावार ली जा सकती है।

झारखंड और बिहार जैसे पूर्वी राज्यों में धान की कटाई देर से होने के कारण अक्सर गेहूं की बुवाई पिछड़ जाती है। ऐसे किसान धान कटते ही खेत तैयार करें और जीरो टिलेज मशीन से सीधी बुवाई पर विचार कर सकते हैं, जिससे समय और लागत दोनों बचते हैं।